Business · India Bureau
2027 में खाद्य और खाद संकट की चेतावनी, भारत पर असर
जेपीमॉर्गन ने 2027 तक खाद्य और उर्वरक संकट की चेतावनी दी है। मध्य पूर्व से होने वाली वैश्विक यूरिया निर्यात का 42 प्रतिशत भारत जैसे कृषि प्रधान देशों को प्रभावित कर सकता है।
LSN India ·
वित्तीय संस्थान जेपीमॉर्गन ने आने वाले वर्षों में वैश्विक खाद्य और उर्वरक बाजार में गंभीर संकट की संभावना जताई है। विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व विश्व के उर्वरक उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां से वैश्विक यूरिया निर्यात का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा आता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास किसी भी प्रकार के दीर्घकालीन व्यवधान से उर्वरक की आपूर्ति में बाधा आ सकती है। यह स्थिति उर्वरक की कीमतों में तेजी से वृद्धि ला सकती है, जिससे विश्वभर के किसानों की उत्पादन लागत बढ़ेगी। भारत जैसे कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था वाले देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।
भारत अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर आयातित उर्वरकों पर निर्भर करता है। यूरिया की कीमतों में किसी भी उछाल से देश के किसानों की आय प्रभावित होगी और खाद्य उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, उर्वरक की कमी से खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ने की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत सहित विकासशील देशों को इस संभावित संकट के लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। देश के नीति निर्माताओं को उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।