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न्यायाधीश के पद को त्यागकर साध्वी बनीं बैतूल की प्रखरश्री दीदी
बैतूल की एक महिला ने न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति मिलने के बाद जैन धर्म में दीक्षा लेने का फैसला किया। इस अलौकिक घटनाक्रम को लेकर जैन समाज में व्यापक उत्साह देखा गया।
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बैतूल में एक असामान्य घटनाक्रम देखने को मिला जब एक महिला ने न्यायपालिका में करियर की सुनिश्चित भविष्यवाणी को ठुकरा कर धार्मिक जीवन को अपनाया। प्रखरश्री दीदी को न्यायाधीश के पद पर चयनित होने के तुरंत बाद वे दीक्षा ग्रहण के लिए प्रतिबद्ध हुईं। इस निर्णय ने स्थानीय जैन समाज में अभूतपूर्व भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
दीक्षा समारोह में पांच महिला दीक्षार्थियों की भव्य बिनौली निकाली गई। इस जुलूस में विंटेज कारें, शाही बग्घियां और संगीत दल शामिल थे, जिससे यह आयोजन अत्यंत화णी और दृश्यमान हो गया। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से जैन समाज के सदस्य इस ऐतिहासिक पल को साक्षी बनने के लिए एकत्रित हुए।
प्रखरश्री दीदी के इस निर्णय को जैन समुदाय ने उनकी धार्मिक प्रतिबद्धता और आध्यात्मिक समर्पण के प्रमाण के रूप में देखा। यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए गौरव का विषय बन गया। उनके साथ दीक्षा लेने वाली अन्य महिलाओं ने भी समान धार्मिक मार्ग को स्वीकार किया।