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न्यायाधीश के साथ अन्याय पर जज का सवाल, 97 हत्या मामले रिकॉल कराए गए
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने अपनी अदालत से 97 हत्या की पत्रावलियां वापस लेने पर सवाल उठाए हैं। न्यायाधीश ने पूछा है कि जब स्वयं न्यायाधीश के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए।
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मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने एक दशक पुराने नशीली दवाओं के मामले का निर्णय सुनाते समय प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपनी अदालत से 97 हत्या की पत्रावलियां रिकॉल किए जाने के मामले में जज दिवाकर ने व्यथित होकर पूछा है कि यदि न्यायाधीश के साथ ही न्याय नहीं हो तो वह किस दरवाजे पर दस्तक दे सकता है।
एनडीपीएस कानून के तहत चल रहे इस मामले में साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त अशोक भारती को दंडमुक्त किया गया है। अदालत ने निर्णय में अपनी असंतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा है कि बिना उचित कारण के मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया न केवल न्यायिक प्रणाली को कमजोर करती है बल्कि न्यायाधीशों के अधिकार का भी उल्लंघन करती है।
जज दिवाकर का यह कदम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उठाए गए सवालों को रेखांकित करता है। उनका मानना है कि ऐसी प्रशासनिक कार्रवाइयां न केवल न्यायाधीश बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था के साथ अन्याय करती हैं।