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सर्वोच्च न्यायालय की क्षमाशीलता समाप्त करनी चाहिए: न्यायाधीश
एक न्यायाधीश ने कहा है कि मृत्यु दंड में छूट देने से गंभीर अपराधों में वृद्धि हो रही है। यह टिप्पणी एक दंपति की समय पूर्व रिहाई की याचिका सुनते समय आई, जो 2001 के एक भीषण हत्या कांड में आठ लोगों की हत्या के लिए आजीवन कारावास काट रहे हैं।
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सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने मंगलवार को कहा कि न्यायपालिका की अत्यधिक क्षमाशील नीति अपराध दरों को बढ़ावा दे रही है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मृत्यु दंड में लगातार छूट और रूपांतरण से गंभीर अपराधों के मामले में कमी नहीं आ रही है। इस नीति के कारण अपराधियों में दंड से बचने का साहस बढ़ रहा है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश के समक्ष एक दंपति की समय पूर्व रिहाई के लिए याचिका प्रस्तुत की गई थी। यह दंपति साल 2001 में एक भीषण हत्या कांड में शामिल था जिसमें आठ लोगों की जान चली गई थी। आरोपी दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यदि न्यायपालिका अपनी इस क्षमाशील नीति को जारी रखेगी तो समाज में अपराध का भय खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्याय व्यवस्था को अधिक कठोर रुख अपनाना चाहिए।
मामले की सुनवाई जारी है और न्यायालय आने वाले दिनों में अपना निर्णय सुनाएगा।