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न्यायपालिका को जनता का विश्वास पाने के लिए खुद को जांच के दायरे में रखना होगा: मुख्य न्यायाधीश
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि अदालतें जनता की आलोचना से बचकर विश्वास नहीं अर्जित कर सकतीं। उनके अनुसार न्यायपालिका को निरीक्षण, प्रश्नों और आवश्यकता पड़ने पर आलोचना को स्वीकार करना चाहिए।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन पर जोर देते हुए कहा है कि अदालतें खुद को सार्वजनिक परीक्षा से परे नहीं रख सकतीं।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को जनता का आस्था अर्जित करने के लिए पारदर्शिता और खुलेपन का प्रदर्शन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अदालतें बार-बार जांच, सवालों और जहां आवश्यक हो, आलोचना के लिए तैयार रहनी चाहिए।
इस बयान के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया है कि स्वच्छता और जवाबदेही न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने माना कि अदालतें स्वतंत्र होने के बावजूद समाज के प्रति जिम्मेदार हैं।
यह वक्तव्य न्यायपालिका की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के विषय पर चल रहे वृहत्तर विमर्श में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान न्यायिक सुधार और संस्थागत विश्वास के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।