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न्यायपालिका छात्रों के विरोध के अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध: मुख्य न्यायाधीश
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ सीधी बातचीत के दौरान कहा कि न्यायपालिका छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) में एक बेलाग संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि संविधान के तहत नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों की रक्षा करना न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी शामिल है।
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस अंतःक्रिया कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे छात्रों के साथ सीधे और स्पष्ट संवाद में विश्वास रखते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि न्यायिक व्यवस्था को युवा पीढ़ी की चिंताओं और दृष्टिकोण को समझना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश के इस बयान को कानून और लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह संदेश तब सामने आया है जब देश के कई शहरों में छात्र विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सीएनएलयू के छात्रों के साथ इस मुलाकात के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और सुलभता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने की आजादी और सुरक्षित वातावरण दोनों ही आवश्यक हैं।