Culture & Entertainment · India Bureau
किशोर न्याय कानून के कार्यान्वयन में खामियां: न्यायमूर्ति नागरत्न
राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श में न्यायमूर्ति नागरत्न ने किशोर न्याय प्रणाली में गंभीर अंतराल की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि मामलों के निपटारे तक सीमित रहना काफी नहीं है।
LSN India ·

न्यायमूर्ति नागरत्न ने कहा कि किशोर न्याय प्रणाली को केवल मामलों के तेजी से निपटारे पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श में यह विचार रखे कि प्रणाली में मौजूदा कमियां बच्चों के समग्र विकास में बाधा डाल रही हैं।
न्यायमूर्ति नागरत्न के अनुसार, किशोर न्याय कानून के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रणाली को बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने जोर दिया कि जिन बच्चों के मामले लंबित हैं, उन्हें शिक्षा, परामर्श सेवा, चिकित्सा देखभाल और कानूनी सहायता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का प्रावधान न केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि उन्हें समाज में बेहतर तरीके से पुनः समायोजित करने में भी मदद करता है। न्यायमूर्ति नागरत्न ने संकेत दिया कि विभिन्न स्तरों पर समन्वय और संसाधनों की कमी इन महत्वपूर्ण सेवाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा बन रही है।
उनके विचारों को किशोर न्याय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हितधारक परामर्श का उद्देश्य सभी संबंधित विभागों को एक प्लेटफॉर्म प्रदान करना है ताकि व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें।