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प्रख्यात कन्नड़ भाषाविद् और समीक्षक के.वी. नारायण का निधन
बेंगलुरु में 78 वर्ष की आयु में प्रोफेसर नारायण का निधन हुआ। वे कन्नड़ समुदाय को ज्ञान के स्रोत के रूप में देखने की वकालत करते थे और यूरोकेंद्रिक प्रभाव से मुक्ति का आह्वान करते थे।
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कन्नड़ भाषा और साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर के.वी. नारायण का शुक्रवार को बेंगलुरु में निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। उन्होंने कन्नड़ भाषाविज्ञान और साहित्य समीक्षा के क्षेत्र में दशकों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रोफेसर नारायण अपने विचारशील दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे, जिसमें वे कन्नड़ संस्कृति और समुदाय को ज्ञान और बौद्धिक चिंतन के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में प्रस्तुत करते थे। उन्होंने पश्चिमी या यूरोकेंद्रिक प्रभावों से मुक्त होकर भारतीय भाषाओं और साहित्य के अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनके अकादमिक कार्य ने कई पीढ़ियों के विद्यार्थियों को प्रभावित किया और कन्नड़ भाषा की समृद्ध परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह तर्क दिया कि भारतीय ज्ञान परंपराओं को उनके अपने संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
प्रोफेसर नारायण की विद्वत्ता और योगदान को दक्षिण भारत की शैक्षणिक जगत में व्यापक रूप से स्वीकृति मिली है। उनके लेखन और शिक्षण कार्य कन्नड़ समीक्षा विद्या में एक मजबूत आधार प्रदान करते रहेंगे।