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कन्नड़ राज्योत्सव: सदी पुरानी परंपरा, सात दशक का राज्य
नवंबर आते ही कन्नड़भाषी समुदाय कन्नड़ राज्योत्सव मनाने की तैयारी करता है। यह पर्व 1956 में अलग कन्नड़ राज्य के गठन की खुशी में मनाया जाता है, जिसे पूर्व मद्रास, बंबई प्रेसीडेंसी और हैदराबाद रियासत के कन्नड़भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया था।
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कन्नड़ राज्य के स्थापना दिवस को चिह्नित करने वाला कन्नड़ राज्योत्सव भारतीय संघ में भाषाई पुनर्गठन के एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है। 1956 में देश के पुनर्गठन के दौरान विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों को एकीकृत कर एक समृद्ध कन्नड़ भाषी राज्य का निर्माण किया गया था।
इस राज्य के निर्माण में मद्रास प्रेसीडेंसी, बंबई प्रेसीडेंसी और हैदराबाद रियासत के कन्नड़भाषी इलाकों को शामिल किया गया। इसके अलावा कई छोटी रियासतों को भी इसमें मिलाया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्राचीन मैसूर साम्राज्य, जो 13वीं सदी से कन्नड़ संस्कृति का रक्षक रहा है, इसी नए राज्य का केंद्रबिंदु बना।
नवंबर के महीने में होने वाले इस पर्व के दौरान कन्नड़ भाषी क्षेत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन किया जाता है। यह दिन कन्नड़ समुदाय के लिए अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को जश्न देने का अवसर प्रदान करता है।
राज्योत्सव न केवल ऐतिहासिक महत्व का पर्व है, बल्कि भारतीय संघवाद में भाषाई राज्यों की अवधारणा के सफल क्रियान्वयन का जीवंत उदाहरण भी है। सात दशक पहले स्थापित इस राज्य ने भाषा के आधार पर भारतीय राजनीतिक संरचना को नए आयाम दिए।