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बेंगलुरु की आईटी कंपनियों पर कन्नड़ कार्यकर्ताओं का दबाव, नौकरी आरक्षण की मांग
कर्नाटक राज्य में स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों का आरक्षण सुनिश्चित करने की दशकों पुरानी मांग को लेकर कन्नड़ भाषी संगठन सोमवार से बेंगलुरु की प्रযुक्ति कंपनियों को निशाना बना रहे हैं। कर्नाटक राक्षण वेदिका के नेतृत्व में चलाया जा रहा यह अभियान प्रमुख आईटी फर्मों के खिलाफ दबाव बढ़ाने का प्रयास है।
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बेंगलुरु की सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग पर कर्नाटक स्थानीयवादी आंदोलन का दबाव बढ़ता जा रहा है। कर्नाटक राक्षण वेदिका (केआरवी) नामक संगठन के सदस्य सोमवार से तकनीकी कंपनियों का दौरा करना शुरू कर चुके हैं, जिससे राज्य में स्थानीय नियुक्तियों के सवाल को लेकर नई बहस खड़ी हो गई है।
यह अभियान कई दशकों पुरानी मांग को नया आयाम देता है। कर्नाटक में निवास करने वाले और कन्नड़ भाषी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की यह मांग वर्षों से विभिन्न स्थानीय संगठनों द्वारा उठाई जाती रही है।
बेंगलुरु भारत के सबसे बड़े आईटी हबों में से एक है, जहां देशभर से प्रतिभाएं काम करती हैं। हालांकि, कन्नड़ भाषी कार्यकर्ताओं का तर्क है कि स्थानीय नागरिकों को रोजगार के अवसर में पर्याप्त स्थान नहीं दिया जा रहा है।
इस अभियान से आईटी उद्योग और स्थानीयवादी मांगों के बीच का पुराना तनाव फिर से सामने आ गया है। राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के बीच इस मुद्दे पर आगे की चर्चा होने की संभावना है।