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कप्पन का दावा: उच्च न्यायालय को अयोग्यता याचिका पर अधिकार नहीं
पत्रकार सिद्धू कप्पन ने उच्च न्यायालय से तर्क दिया है कि अयोग्यता संबंधी याचिका पर विचार करने का अधिकार केवल आंतरिक निकायों को है। कप्पन का कहना है कि न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ता सिद्धू कप्पन ने अपनी अयोग्यता संबंधी याचिका पर उच्च न्यायालय की सुनवाई पर आपत्ति जताई है। कप्पन की ओर से दायर अर्जी में तर्क दिया गया है कि न्यायालय को इस मामले पर विचार करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
कप्पन के कानूनी दल का दावा है कि अयोग्यता संबंधी प्रश्नों का निर्णय केवल सक्षम प्राधिकारों और आंतरिक प्रणालियों द्वारा किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, न्यायालय को ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा का अधिकार नहीं है।
यह मामला कप्पन के राजनीतिक और पेशेवर भविष्य से संबंधित है। उनका पक्ष यह तर्क दे रहा है कि किसी व्यक्ति की अयोग्यता का निर्धारण केवल निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा सकता है, न कि न्यायालय के माध्यम से।
यह मामला संवैधानिक अधिकार क्षेत्र और न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। अगली सुनवाई में न्यायालय के फैसले का इंतजार है।