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कर्नाटक 2030 तक 66 गीगावाट बिजली क्षमता का लक्ष्य रखेगा
कर्नाटक सरकार अपनी ऊर्जा नीति का केंद्र बिंदु नवीकरणीय ऊर्जा को बनाते हुए 2030 तक 66 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह योजना राज्य के ऊर्जा विकास और जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है।
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कर्नाटक ने अपनी ऊर्जा क्षेत्र की रणनीति में बड़े बदलाव के साथ 2030 तक 66 गीगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य ने नवीकरणीय ऊर्जा को अपनी ऊर्जा विकास रणनीति के मूल में रखा है।
सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर केंद्रित यह दृष्टिकोण राज्य की बिजली आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिकीकृत करने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश से राज्य की ऊर्जा स्वावलंबन क्षमता में भी वृद्धि होगी।
यह कदम कर्नाटक को भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी राज्यों में से एक के रूप में स्थापित करने का संकेत है। राज्य सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकास और नीतिगत सुधार पर कार्य कर रही है।
कर्नाटक का यह ऊर्जा विस्तार योजना न केवल बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बल्कि देश के राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों में योगदान देने के लिए भी तैयार किया गया है।