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कर्नाटक ने विवाह पंजीकरण नियमों को सख्त किया, आधार को उम्र का प्रमाण नहीं माना
कर्नाटक सरकार ने विवाह पंजीकरण के दौरान आधार कार्ड को आयु प्रमाण के रूप में स्वीकार न करने का निर्देश दिया है। यह कदम आधार और जन्म प्रमाण पत्र में उम्र के मेल न खाने से बाल विवाह की घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।
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कर्नाटक राज्य ने विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार करते हुए आधार कार्ड को आयु प्रमाण के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। यह निर्देश तब जारी किया गया जब प्रशासन को ऐसी कई घटनाओं का सामना करना पड़ा जहां आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज उम्र में विसंगति पाई गई।
राज्य अधिकारियों का कहना है कि ये विसंगतियां बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां पैदा कर रही हैं। विभिन्न दस्तावेजों में उम्र से संबंधित असंगतियों का लाभ उठाकर नाबालिग लड़कियों का विवाह कराया जा रहा था।
नए नियमों के तहत विवाह पंजीकरण के समय आवेदकों को जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र या अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी वास्तविक उम्र साबित करनी होगी। आधार कार्ड अकेले आयु का प्रमाण मानने से इनकार करके कर्नाटक सरकार बाल विवाह को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
यह निर्णय भारत की राष्ट्रीय नीति के अनुरूप है जो बाल विवाह को रोकने और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। कानूनी दृष्टि से, भारत में 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों का विवाह निषिद्ध है।