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कर्नाटक में दो साल बाद भी छोटे मधुमक्खी भृंग से मधुपालकों को खतरा
कर्नाटक के मधुपालक दो वर्षों से स्मॉल हाइव बीटल के कहर से जूझ रहे हैं। यह कीट मधुमक्खी के छत्तों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है और शहद उत्पादन में गिरावट ला रहा है।
LSN India ·

कर्नाटक के मधुपालकों के लिए स्मॉल हाइव बीटल (छोटा मधुमक्खी भृंग) एक लगातार बढ़ती समस्या बनी हुई है। पिछले दो वर्षों में इस कीट के आक्रमण से राज्य के कई इलाकों में मधुमक्खी के छत्तों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। स्थानीय मधुपालकों ने इस समस्या के कारण अपनी आजीविका को खतरे में पड़ते देखा है।
स्मॉल हाइव बीटल एक विनाशकारी कीट है जो मधुमक्खी के छत्तों में घुसकर शहद, पराग और लार्वा को नष्ट कर देता है। इस कीट की मौजूदगी से मधुमक्खियों का विकास रुक जाता है और पूरी कॉलोनी को नुकसान हो सकता है। कर्नाटक के विभिन्न जिलों में इसके प्रकोप के कारण शहद उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।
कृषि विभाग और मधुपालन संबंधी संस्थाएं इस समस्या का समाधान निकालने के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि, अभी तक कीट को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपायों का क्रियान्वयन सीमित रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समन्वित प्रबंधन और निवारक उपायों के जरिए इस समस्या से निपटा जा सकता है।
राज्य के मधुपालकों ने सरकार से इस कीट के नियंत्रण के लिए व्यापक कार्यक्रम लागू करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने किसानों को जागरूकता प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। मधुपालन क्षेत्र को बचाने के लिए इसे एक आपातकालीन मुद्दा माना जा रहा है।