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कर्नाटक पांच साल में 30 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य
कर्नाटक ने 2034-35 तक 41.5 गीगावाट पवन और सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने की महत्वाभिलाषी योजना बनाई है। राज्य बैटरी ऊर्जा भंडारण में भी लगभग 11,000 मेगावाट घंटे की क्षमता विकसित करेगा।
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कर्नाटक सरकार अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को काफी हद तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता के अनुसार, राज्य आने वाले वर्षों में पवन और सौर शक्ति में भारी निवेश करेगा। यह योजना राज्य की स्वच्छ ऊर्जा में संक्रमण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
2034-35 तक, कर्नाटक की कुल योजना 41.5 गीगावाट नई पवन और सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने की है। यह विस्तार राज्य की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए आवश्यक है। इस महत्वाभिलाषी कार्यक्रम से हजारों नई नौकरियां भी सृजित होने की संभावना है।
ऊर्जा भंडारण क्षमता राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कर्नाटक लगभग 11,000 मेगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण सुविधाएं विकसित करने की योजना बना रहा है। यह भंडारण क्षमता पवन और सौर ऊर्जा की परिवर्तनशील प्रकृति को संभालने में मदद करेगी।
भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को प्राप्त करने में कर्नाटक एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। राज्य की यह पहल तकनीकी नवाचार और बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश को प्रदर्शित करती है। अगले दशक में कर्नाटक ऊर्जा क्षेत्र में भारत का अग्रदूत बन सकता है।