Politics · India Bureau
कर्नाटक हाई कोर्ट में स्टाफ नर्स के मामले में सनसनी: 16 साल से 10 हजार का वेतन
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक स्टाफ नर्स को 16 वर्षों तक न्यूनतम वेतन मिलने के मामले में सरकारी अधिकारियों से व्याख्या मांगी है। अदालत ने जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने में अनावश्यक विलंब के लिए प्राधिकारियों को दोषी माना है।
LSN India ·

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग से कड़े सवाल उठाए हैं, जहां एक स्टाफ नर्स को पिछले 16 सालों से मात्र 10 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। अदालत ने इस मामले में अपनी पूर्व आदेशों के बावजूद कर्मचारी को उचित वेतन न दिए जाने पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया है।
न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा तब सामने आया जब कमीशन में जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने में भारी विलंब का विषय उठाया गया। अधिकारियों की ओर से इस प्रमाणपत्र को लंबे समय से रोके रखने के कारण नर्स को उपयुक्त वेतन स्तर से वंचित रहना पड़ा है। अदालत ने सरकारी तंत्र की इस लापरवाही को लेकर चिंता व्यक्त की है।
हाई कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों का पालन न किए जाने पर राज्य प्राधिकारियों से विस्तृत जवाबदेही मांगी है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि संबंधित विभाग को इस मामले की तुरंत सुनवाई की जानी चाहिए और कर्मचारी को बकाया वेतन का निपटारा किया जाना चाहिए।
यह मामला सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक विलंब और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा में न्यायालय की भूमिका को रेखांकित करता है। अदालत के इस हस्तक्षेप से समान परिस्थितियों में अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।