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कर्नाटक में अनुसूचित जाति-जनजाति के मेडिकल सीटों में भारी गिरावट
कर्नाटक सरकार द्वारा आरक्षण मैट्रिक्स में किए गए परिवर्तनों के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए चिकित्सा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। उच्च न्यायालय में बढ़े हुए आरक्षण के विरुद्ध मामलों की सुनवाई जारी है।
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कर्नाटक में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के लिए चिकित्सा शিक्षा में आरक्षण की संख्या में तीव्र गिरावट आई है। राज्य सरकार ने आरक्षण मैट्रिक्स को पुनर्गठित करते हुए पहले के आरक्षण मानदंडों को बहाल किया है, जिससे इन समुदायों के लिए उपलब्ध सीटें कम हो गई हैं।
कर्नाटक उच्च न्यायालय में आरक्षण में बढ़ोतरी के खिलाफ कई याचिकाएं लंबित हैं। इन मामलों की सुनवाई प्रक्रिया जारी है, जिसके दौरान राज्य सरकार ने आरक्षण प्रणाली में संशोधन किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय एससी और एसटी उम्मीदवारों की चिकित्सा पेशे में प्रवेश के अवसरों को प्रभावित करेगा।
राज्य में मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण नीति पिछले कुछ वर्षों से विवादास्पद रही है। सरकार द्वारा आरक्षण में किए गए परिवर्तनों के बारे में विभिन्न हितधारकों की अलग-अलग राय रही है। शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि निर्णय कानूनी ढांचे के अनुसार लिए गए हैं।
इस मुद्दे पर सामाजिक न्याय संगठनों की ओर से चिंता व्यक्त की जा रही है। उनका तर्क है कि आरक्षण में कमी सामाजिक समानता के लक्ष्य के विरुद्ध है। कर्नाटक उच्च न्यायालय से आशा की जा रही है कि वह मामलों की शीघ्र निर्णय दे।