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कर्नाटक सरकार ने सकल अधिनियम के तहत कर्मचारी सेवाएं लाईं
कर्नाटक सरकार ने प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों को मानते हुए सभी क्षेत्रीय विभागों में कर्मचारी सेवाओं को समय-सीमा के अंतर्गत लाया है। विलंब और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के लिए कठोर दंड निर्धारित किए गए हैं।
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कर्नाटक सरकार ने प्रशासनिक सुधार आयोग की सातवीं रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर सभी सरकारी कर्मचारियों की आंतरिक सेवाओं को सकल अधिनियम के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी क्षेत्रीय स्तर के विभागों और संगठनों में कर्मचारी सेवाएं जैसे पदोन्नति, अवकाश स्वीकृति, स्थानांतरण और अन्य प्रशासनिक कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे। प्रत्येक सेवा के लिए विशिष्ट समय-सारणी तय की गई है।
नियमों के अनुसार, तय समय सीमा के भीतर सेवा प्रदान न करने पर संबंधित अधिकारियों को भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, दुर्भावनापूर्ण या झूठी शिकायत दर्ज करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल से सरकारी कर्मचारियों को अपनी सेवाओं के संबंध में सुनिश्चितता मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकारी कामकाज की गुणवत्ता में सुधार लाएगा और अनावश्यक विलंब को रोकेगा।