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कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून बारिश 70 साल में दूसरी सबसे कम
कर्नाटक में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा 125 वर्षों के रिकॉर्ड में सातवीं सबसे कम दर्ज की गई है। 2002 के बाद यह सबसे गंभीर सूखे जैसी स्थिति है।
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कर्नाटक राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा की मात्रा पिछले 70 वर्षों में दूसरी सबसे न्यून रही है। मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की बारिश का स्तर 1956 के बाद से सबसे कम वर्षा दर्ज करने वाले 2002 से मात्र 10 मिलीमीटर अधिक है। यह स्थिति राज्य की कृषि और जल संसाधनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
पिछले 125 वर्षों के वृहत्तर डेटा की दृष्टि से देखा जाए तो कर्नाटक की वर्तमान वर्षा स्थिति सातवीं सबसे कम है। यह आंकड़ा न केवल राज्य के मानसून पैटर्न में एक महत्वपूर्ण विचलन को दर्शाता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों की ओर भी इशारा करता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून कर्नाटक की वार्षिक वर्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदान करता है और कृषि उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। इस तरह की कमजोर वर्षा का असर राज्य की सिंचाई परियोजनाओं, जलाशयों के स्तर और फसल उत्पादन पर सीधे प्रभाव डालने वाला है।