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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यूबीएल शेयरों की गिरवी को बैंकों के दावे पर प्राथमिकता दी
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि बैंकों का व्यक्तिगत गारंटी और संविदात्मक प्रतिबंध, मल्लया के यूबीएल शेयरों की गिरवी पर अधिकार स्थापित नहीं कर सकते। न्यायालय ने ₹6,203 करोड़ के बैंक दावे को खारिज कर दिया है।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यूनाइटेड ब्रूअरीज लिमिटेड (यूबीएल) के शेयरों की गिरवी को बैंकों के बड़े वित्तीय दावे के ऊपर वैधानिक प्राथमिकता दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बैंकों द्वारा दिए गए व्यक्तिगत गारंटी और संविदात्मक प्रतिबंध, गिरवी के अधिकारों को अभिभूत नहीं कर सकते।
इस मामले में बैंकों ने ₹6,203 करोड़ की वसूली के लिए दावा दायर किया था, जिसमें वे यूबीएल शेयरों पर प्रथम अधिकार का दावा कर रहे थे। उच्च न्यायालय ने विस्तृत विश्लेषण के बाद निर्धारित किया कि शेयरों पर पहले से स्थापित गिरवी का अधिकार बैंकों के दावे से कहीं अधिक मजबूत है।
न्यायालय का निर्णय सुरक्षित ऋण और गिरवी अधिकारों के कानूनी सिद्धांतों पर आधारित है। फैसले में कहा गया है कि अकेले व्यक्तिगत गारंटी या संविदात्मक शर्तें वास्तविक संपत्ति पर स्थापित गिरवी के अधिकार को निरस्त नहीं कर सकती हैं। यह निर्णय संपार्श्विक और प्रतिभूति अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल स्थापित करता है।