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कर्नाटक हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में बच्चे के पिता के खिलाफ पोक्सो मामला खारिज किया
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने माना कि माता द्वारा वैवाहिक कलह के दौरान पोक्सो कानून का दुरुपयोग किया गया था। अदालत ने पिता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गंभीर मानने में विफल रहते हुए केस को रद्द कर दिया।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में बच्चे के पिता के खिलाफ दर्ज पोक्सो (बालकों का यौन शोषण) मामले को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि पत्नी ने वैवाहिक विवाद के दौरान बाल संरक्षण कानून का दुरुपयोग करते हुए मनगढ़ंत आरोप लगाए थे। यह निर्णय ऐसे मामलों में कानून के दुरुपयोग की चिंताओं को रेखांकित करता है जहां पारिवारिक विवादों को गंभीर अपराधों में तब्दील किया जाता है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आरोपों में कोई विश्वसनीयता नहीं थी और साक्ष्य पिता की दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने यह भी नोट किया कि ऐसे गंभीर आरोपों को पारिवारिक कलह का निपटारा करने के साधन के रूप में नहीं उपयोग किया जाना चाहिए। न्यायाधीशों ने कहा कि बालकों के संरक्षण के लिए बनाए गए कानूनों को उनके वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप ही लागू किया जाना चाहिए।
यह निर्णय न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संदेश भेजता है कि वैवाहिक विवादों में कानून का दुरुपयोग करने वाले पक्षों के खिलाफ कठोर रुख अपनाया जाएगा। अदालत की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि ऐसे मामलों में सबूतों की सावधानीपूर्वक जांच की आवश्यकता है ताकि निर्दोष लोग कानून के दुरुपयोग का शिकार न बनें। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि माता-पिता के बीच विवादों का समाधान उचित पारिवारिक परामर्श और मध्यस्थता के माध्यम से किया जाना चाहिए।