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तलाक के बाद भी माता-पिता की जिम्मेदारी बनी रहती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक दंपति को तलाक देते हुए कहा कि वे अपने बच्चों के सामने एक-दूसरे की आलोचना न करें। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विवाह विच्छेद के बाद भी माता-पिता की जिम्मेदारी और कर्तव्य यथावत रहते हैं।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में विवाहित दंपति को तलाक देते हुए कहा है कि भले ही उनका विवाह समाप्त हो जाए, लेकिन बच्चों के प्रति उनकी जिम्मेदारियां बनी रहती हैं। न्यायालय ने विशेष रूप से अपने नाबालिग बच्चों के सामने एक-दूसरे की आलोचना न करने की सलाह दी है। न्यायाधीश ने कहा कि माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनके बीच के मतभेद बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित न करें। अदालत का मानना है कि बच्चों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, भले ही माता-पिता के संबंध खत्म हो गए हों। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सलाह दी है कि वे तलाक के बाद भी एक-दूसरे के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें और बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहयोग करें। कर्नाटक हाईकोर्ट का यह निर्णय परिवार कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करता है और दिखाता है कि अदालतें बच्चों के हितों को किस प्रकार प्राथमिकता देती हैं।