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कर्नाटक हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण वृद्धि को खारिज किया
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण में वृद्धि की मांग को अस्वीकार कर दिया है। न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के 1992 के निर्णय में निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा का हवाला दिया है।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण कोटा बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। न्यायालय का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित संवैधानिक सीमा पर आधारित है।
न्यायालय के फैसले में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 1992 के ऐतिहासिक इंद्र साहनी बनाम भारत संघ निर्णय में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की थी। इस निर्णय का पालन करना सभी राज्यों के लिए अनिवार्य है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के बाद के कई फैसलों में भी इसी 50 प्रतिशत की सीमा को बरकरार रखा गया है। राज्य इस संवैधानिक ढांचे से परे नहीं जा सकता।
हालांकि विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर आरक्षण में वृद्धि की मांग करते रहे हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या यह है कि अत्यधिक आरक्षण से योग्यता प्रभावित होती है और सामान्य वर्ग के नागरिकों के साथ भेदभाव होता है। न्यायालय का यह निर्णय देश में आरक्षण नीति पर व्याप्त कानूनी स्पष्टता को और मजबूत करता है।