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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बाल हिरासत मामलों में 'विजिटेशन' की जगह 'पेरेंटिंग टाइम' का आदेश दिया
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सभी बाल हिरासत मामलों में 'विजिटेशन' शब्द की जगह 'पेरेंटिंग टाइम' का उपयोग करने का निर्देश दिया है। न्यायालय का मानना है कि यह शब्दावली बदलाव कानूनी व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बाल कल्याण से संबंधित सभी न्यायिक कार्यवाहियों में महत्वपूर्ण भाषागत सुधार का आदेश दिया है। न्यायालय के निर्णय के अनुसार, सभी बाल हिरासत मामलों में कानूनी दस्तावेजों में 'विजिटेशन' शब्द के स्थान पर 'पेरेंटिंग टाइम' का उपयोग किया जाएगा।
न्यायालय ने इस निर्णय का कारण बताते हुए कहा कि 'पेरेंटिंग टाइम' शब्द का उपयोग एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण सत्य को दर्शाता है। कोई भी माता-पिता अपने बच्चे के जीवन में महज एक 'आगंतुक' नहीं होते, बल्कि वे सक्रिय अभिभावक होते हैं। यह शब्दावली परिवर्तन अभिभावकत्व की वैधानिक मान्यता में सुधार करने का लक्ष्य रखता है।
इस निर्णय को बाल मनोविज्ञान और पारिवारिक कानून के क्षेत्र में एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा का यह परिवर्तन न केवल कानूनी पत्रावली में बदलाव है, बल्कि यह बच्चों के प्रति समाज के दृष्टिकोण में भी सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय का यह आदेश अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित कर सकता है। बाल कल्याण और पारिवारिक न्यायशास्त्र से संबंधित मामलों में भाषागत सटीकता को बढ़ावा देने का यह प्रयास भारतीय न्यायिक व्यवस्था में एक सार्थक योगदान माना जा रहा है।