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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केपीएससी अध्यक्ष के निलंबन को रद्द किया
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्यपाल द्वारा केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहुकार के निलंबन को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने माना कि यह निलंबन कानूनी रूप से खामियों से भरा था क्योंकि राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह के बिना कार्रवाई की थी।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहुकार का निलंबन कानूनी रूप से अमान्य है। न्यायालय के अनुसार, राज्यपाल को ऐसी महत्वपूर्ण कार्रवाई करने से पहले राज्य मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह लेनी चाहिए थी।
यह निर्णय संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल के पास किसी भी कार्यकारी निर्णय को अकेले लेने की शक्ति नहीं है, खासकर जब वह किसी उच्च पदाधिकारी के कार्यकाल को प्रभावित करता है।
इस मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक सीमाओं के बारे में महत्वपूर्ण सवाल उठे हैं। निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि राज्य के प्रशासन में मंत्रिमंडल की भूमिका अपरिहार्य है।
इस फैसले के बाद साहुकार अपने पद पर बहाल हो गए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय आगे के समय में राज्यपाल की शक्तियों के सही उपयोग के लिए एक मिसाल स्थापित करता है।