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कर्नाटक हाईकोर्ट ने हनुमान जन्मस्थान मंदिर को मुजराई विभाग के अधीन लाने के आदेश को रद्द किया
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के उन आदेशों को रद्द कर दिया है जो हनुमान जन्मस्थान माने जाने वाले मंदिर को धार्मिक संपत्ति विभाग (मुजराई) के नियंत्रण में लाने का प्रयास कर रहे थे।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए उन आदेशों को रद्द कर दिया है जो भगवान हनुमान के जन्मस्थान के रूप में माने जाने वाले एक प्राचीन मंदिर को राज्य के धार्मिक संपत्ति विभाग (मुजराई विभाग) के अधीन लाने का प्रयास कर रहे थे। यह निर्णय मंदिर के स्वायत्त प्रबंधन की अनुमति देते हुए सरकारी हस्तक्षेप को सीमित करता है।
हाईकोर्ट के इस आदेश से मंदिर के मौजूदा प्रबंधन तंत्र को मजबूती मिली है। मुजराई विभाग के अधीन लाने का यह प्रयास स्थानीय समुदाय और मंदिर परिचालकों के विरोध का विषय था, जो मंदिर की ऐतिहासिक स्वतंत्रता को बनाए रखना चाहते थे।
यह मामला धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और नियंत्रण से संबंधित व्यापक प्रश्नों को उजागर करता है। कर्नाटक में कई पुरातन मंदिरों के संबंध में इसी तरह के विवाद देखे गए हैं, जहां राज्य सरकार उन्हें मुजराई विभाग के अधीन लाने का प्रयास करती रहती है।
इस निर्णय के माध्यम से न्यायालय ने राज्य के धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता के सिद्धांत को बरकरार रखा है और सरकारी हस्तक्षेप पर अंकुश लगाया है। माना जा रहा है कि यह निर्णय अन्य समान मामलों में भी महत्वपूर्ण दृष्टांत स्थापित करेगा।