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कर्नाटक कोर्ट ने 50% से अधिक अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण को रद्द किया
कर्नाटक के उच्च न्यायालय ने राज्य सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए 50% से अधिक आरक्षण देने वाले प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया है।
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कर्नाटक के उच्च न्यायालय ने राज्य के आरक्षण कानून में संशोधन करने वाले प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया है। न्यायालय ने कहा कि 50% से अधिक आरक्षण प्रदान करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।
अदालत ने विशेष रूप से अधिनियम की धारा 4 को निरस्त किया है, जो राज्य सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए बढ़े हुए आरक्षण का प्रावधान करती थी। न्यायालय का निर्णय यह है कि यह प्रावधान समानता के अधिकार और सार्वजनिक पद के लिए समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले से ही कई मामलों में स्पष्ट किया गया है कि कुल आरक्षण किसी भी परिस्थिति में 50% से अधिक नहीं हो सकता। इस निर्णय से कर्नाटक में आरक्षण नीति के भविष्य पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
यह फैसला राज्य में वंचित वर्गों को दिए जाने वाले आरक्षण लाभों और संवैधानिक सीमाओं के बीच संतुलन के सवाल को केंद्र में रख देता है। सरकार इस निर्णय के विरुद्ध अपील करने पर विचार कर सकती है।