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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने प्राचीन स्मारकों के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्रों का कानून बरकरार रखा
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने संविधान की वैधता की पुष्टि करते हुए माना कि संरक्षित स्मारकों के 200 मीटर के दायरे में लागू प्रतिबंधात्मक नियम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने प्राचीन स्मारकों के आसपास स्थापित 'प्रतिबंधित' और 'विनियमित' क्षेत्रों संबंधी कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। न्यायालय की यह व्यवस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधिनियम की धारा 20ए, 20बी और 20सी के तहत लागू प्रतिबंधों के संबंध में दी गई है।
न्यायालय ने माना कि ये प्रतिबंधात्मक नियम संरक्षित स्मारकों के चारों ओर 200 मीटर की परिधि में लागू होते हैं। इस दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण, मरम्मत या संशोधन कार्य सख्त नियमों के अधीन है। न्यायालय ने पाया कि ये नियम सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा करते हैं।
अपने निर्णय में, न्यायालय ने कहा कि इन प्रतिबंधों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का कोई अनुचित उल्लंघन नहीं होता। संपत्ति और व्यापार के अधिकारों पर लगाए गए ये सीमाएं संवैधानिक रूप से वैध हैं और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत हैं।
यह निर्णय ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और उनके आसपास के क्षेत्रों के विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है। इस व्यवस्था से देश भर में इसी तरह के कानूनों की कानूनी स्थिति को भी स्पष्टता मिलेगी।