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कर्नाटक ने कावेरी जल बंटवारे पर फिर से विचार करने का संकेत दिया
कर्नाटक सरकार ने सिंधु जल संधि का हवाला देते हुए बदली हुई परिस्थितियों में राज्यों के बीच जल आवंटन को दोबारा जांचने की मंशा जताई है। राज्य ने अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं का संदर्भ दिया है जिनमें आपसी सहमति या न्यायिक निर्णय से जल बंटवारे में परिवर्तन संभव है।
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कर्नाटक सरकार ने कावेरी नदी के जल आवंटन के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि बदलती परिस्थितियों में अंतरराज्यीय जल समझौतों की समीक्षा की जा सकती है। राज्य के अधिकारियों ने सिंधु जल संधि का उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय समझौता है।
कर्नाटक का यह रुख अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांत 'रेबस सिक स्टैंटिबस' पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार, जब परिस्थितियां महत्वपूर्ण रूप से बदल जाती हैं, तो राज्य या देश आपसी समझ या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपने पूर्व समझौतों को दोबारा देख सकते हैं।
राज्य के प्रतिक्रिया पत्र में यह तर्क दिया गया है कि भारत जैसे देशों में अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं को लागू किया जा सकता है। कर्नाटक का पक्ष यह है कि कावेरी जल बंटवारे पर अस्सी के दशक में हुए समझौते को आजकी जरूरतों के अनुरूप समायोजित किया जा सकता है।
यह कदम लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद में एक नया आयाम जोड़ता है, जिसमें तमिलनाडु जैसे पड़ोसी राज्य नियत जल प्राप्त करने के लिए आंदोलन करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति में न्यायिक हस्तक्षेप या पुनः मध्यस्थता ही समाधान का रास्ता हो सकती है।