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कर्नाटक: धार्मिक अल्पसंख्यकों ने धर्मांतरण कानून को निरस्त करने का आह्वान किया
कर्नाटक के धार्मिक अल्पसंख्यक नेताओं ने सरकार से विवादास्पद धर्मांतरण कानून को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया है कि जहां समुदायों को लगातार अपने धार्मिक प्रथाओं को न्यायसंगत ठहराना पड़े, वहां धार्मिक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं रहता।
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कर्नाटक के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से राज्य के धर्मांतरण कानून को निरस्त करने की मांग की है। इन नेताओं का कहना है कि मौजूदा कानून धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
अल्पसंख्यक नेताओं ने जोर दिया है कि जहां व्यक्तियों और समुदायों को अपनी धार्मिक प्रथाओं को लेकर लगातार आपराधिक कृत्य का संदेह झेलना पड़े, वहां सच्ची धार्मिक स्वतंत्रता का अस्तित्व नहीं रह जाता। उनके अनुसार, यह कानून विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच विश्वास और सद्भावना को कमजोर करता है।
इन नेताओं ने सरकार से घृणा भाषण और संप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अधिक प्रभावी कानूनी उपाय भी लागू करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील और समावेशी कानूनी ढांचे की आवश्यकता है।
यह अनुरोध एक बड़ी बहस के बीच आया है जहां धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सद्भावना और कानूनी सुरक्षा के मुद्दे केंद्र में हैं। विभिन्न धार्मिक समुदायों के नेताओं का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सभी को अपनी धार्मिक पहचान को स्वतंत्रता और सम्मान के साथ अभिव्यक्त करने का अधिकार होना चाहिए।