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कर्नाटक में चुनावी नियमों का संकट: पश्चिम बंगाल के बाद अब मतदाताओं के परिवहन पर विवाद
कर्नाटक में कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस ने चुनाव आयोग के कड़े नियमों का विरोध किया है। दलों का कहना है कि नोटिस जारी होने और सुनवाई के बीच कम समय मतदाताओं को सूचित करने और उनकी व्यवस्था करने में बाधा बन रहा है।
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पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं के लिए विमान टिकट की व्यवस्था किए जाने के बाद कर्नाटक में अब समान मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग के सख्त दिशानिर्देशों को लेकर राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल असहमत हैं।
कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्यूलर) का आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए नोटिस और उसकी सुनवाई के बीच बहुत कम समय दिया गया है। इस संकीर्ण समय-सीमा के कारण दलों को मतदाताओं की पहचान करने, उन्हें सूचित करने और विशेषकर राज्य के बाहर रहने वाले मतदाताओं की आवाजाही की व्यवस्था करने में गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
यह विवाद उस समय उठा है जब चुनाव प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। दलों का तर्क है कि यदि पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के परिवहन की अनुमति दी गई है, तो कर्नाटक में भी समान सुविधा के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
इस मामले में चुनाव आयोग की स्पष्ट नीति और सभी राज्यों में एकरूप आचरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक दलों की ओर से यह माना जा रहा है कि आयोग को दलों को अपनी तैयारी पूरी करने के लिए उचित समय देना चाहिए।