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आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी के खिलाफ कर्नाटक पुलिस ने 2012 का मामला दोबारा खोला
कर्नाटक पुलिस ने आत्मसमर्पण करने वाले एक माओवादी कोटेहोंडा रविंद्र के खिलाफ पुरानी कानूनी कार्रवाई दोबारा शुरू की है। पुनर्वास के किए गए वादे पूरे न होने के बीच रविंद्र केरल की जेल में भूख हड़ताल पर हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बनी हुई है।
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कर्नाटक पुलिस ने हिंसक अतीत से मुक्त होने के लिए आत्मसमर्पण करने वाले एक माओवादी के खिलाफ वर्ष 2012 का मामला दोबारा खोल दिया है। इस कदम से आत्मसमर्पण नीति के तहत दिए गए पुनर्वास संबंधी वादों के बारे में सवाल उठ गए हैं।
कोटेहोंडा रविंद्र, जो वर्षों पहले सशस्त्र संघर्ष से संन्यास लेकर सरेंडर कर गए थे, इस समय केरल की एक जेल में बंद हैं। समाचार मिल रहे हैं कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए भी रविंद्र भूख हड़ताल पर चले गए हैं। उनका यह कदम पुनर्वास संबंधी सहायता की कमी और कानूनी कार्रवाई की अनिश्चितता को दर्शाता है।
इस मामले में कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई आत्मसमर्पण नीति की प्रभावकारिता को लेकर चिंताएं बढ़ा गई है। सशस्त्र संघर्ष छोड़ने वाले गुरिल्लाओं को पुनर्वास देने की बजाय उन पर पुराने मामले दोबारा खोलने से सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठते हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से भविष्य में अन्य विद्रोही संगठनों के सदस्यों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करना मुश्किल हो सकता है। रविंद्र की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने और उनकी भूख हड़ताल के कारण इस मामले को लेकर चिंताएं और गहरी हो गई हैं।