Business · India Bureau
कर्नाटक में दशहरा 2026: परंपरा और भव्यता का पर्व
कर्नाटक के विभिन्न जिलों में नवरात्रि और दशहरे की तैयारियां तेज हो गई हैं। मैसूर, मंगलुरु, कोडागु और शिवमोग्गा सहित पूरे राज्य में इस पारंपरिक पर्व को भव्य तरीके से मनाया जाने की योजना है।
LSN India ·

कर्नाटक का दशहरा पर्व, जिसे नाद हब्बा के नाम से भी जाना जाता है, राज्य की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस वर्ष 2026 में दशहरे के अवसर पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में विशेष कार्यक्रमों और उत्सवों की योजना बनाई गई है। नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
मैसूर, कर्नाटक का सांस्कृतिक केंद्र, दशहरे के लिए प्रसिद्ध है। यहां के दशहरे समारोह में ऐतिहासिक महत्व और आधुनिक आयोजन का मिश्रण देखने को मिलता है। इसी तरह मंगलुरु, कोडागु और शिवमोग्गा जिलों में भी नवरात्रि के दौरान परंपरागत रीति-रिवाजों को निभाते हुए सामूहिक उत्सव मनाए जाते हैं।
दशहरे की तैयारियों में स्थानीय समुदाय, कलाकार और सांस्कृतिक संगठन सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से भारतीय परंपराओं को जीवंत रखा जाता है। प्रत्येक जिले के अपने अनूठे तरीके होते हैं, जो स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को प्रतिबिंबित करते हैं।
कर्नाटक का दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भावना और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। इन समारोहों के माध्यम से राज्य अपनी समृद्ध परंपरा को संरक्षित करता है और नई पीढ़ी को इससे जोड़े रखता है।