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कर्नाटक में तुलु को अतिरिक्त राजभाषा का दर्जा दिया जाएगा
दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में तुलु को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिलने वाली है। भारत की जनगणना विभाग दशकों से तुलु को एक स्वतंत्र भाषा के रूप में स्वीकार कर रहा है।
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भारत की जनसंख्या रजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त का कार्यालय तुलु को भारत की एक स्वतंत्र भाषा के रूप में मान्यता देता आया है। यह मान्यता विभाग की स्थापना के बाद से ही बनी हुई है और जनगणना रिपोर्ट में तुलु भाषी समुदाय को अलग भाषिक समुदाय के रूप में दर्ज किया जाता है।
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में तुलु भाषा का व्यापक प्रचलन है। इन क्षेत्रों की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा तुलु को अपनी मातृभाषा मानता है। राज्य सरकार द्वारा इस भाषा को अतिरिक्त राजभाषा का दर्जा देने का निर्णय इस भाषिक समुदाय की लंबे समय से की जा रही मांग को पूरा करता है।
जनगणना आंकड़ों के अनुसार, तुलु एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भाषा है जिसे लाखों लोग बोलते हैं। इसे आधिकारिक मान्यता देना भाषिक विविधता को संरक्षित रखने और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।