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कर्नाटक का पश्चिमी घाट संरक्षण प्रस्ताव से विरोध, जानिए क्यों
कर्नाटक विधानमंडल ने पश्चिमी घाट के लिए पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र की केंद्रीय योजना का विरोध जारी रखा है। राज्य ने अपना वैकल्पिक प्रस्ताव पेश किया है जो आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का दावा करता है।
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कर्नाटक विधानमंडल ने 22 सितंबर को एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करने की केंद्रीय योजना को खारिज किया। राज्य लगातार इस मसौदे का विरोध कर रहा है जिसे लागू किए जाने से क्षेत्र के विकास पर प्रतिबंध लगेंगे।
कस्तूरीरंगन समिति ने पश्चिमी घाट के एक बड़े हिस्से को संवेदनशील घोषित किए जाने की सिफारिश की थी। इस प्रस्ताव के तहत पश्चिमी घाट के विभिन्न क्षेत्रों को ईएसए के रूप में चिह्नित किया गया था, जिससे खनन, बड़े पैमाने पर निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लगनी थीं।
कर्नाटक की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि सुझाए गए प्रतिबंध राज्य की आर्थिक वृद्धि और विकास परियोजनाओं को बाधित करेंगे। विशेषकर पश्चिमी क्षेत्र के जिलों में कृषि, खनन और अन्य आजीविका संबंधी गतिविधियां प्रभावित होंगी।
इस संदर्भ में कर्नाटक ने एक वैकल्पिक रणनीति प्रस्तावित की है जो पर्यावरणीय संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने का दावा करती है। राज्य का मानना है कि इस दृष्टिकोण से पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक मूल्य को बनाए रखते हुए स्थानीय समुदायों के विकास की गुंजाइश बनी रहेगी।