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कर्नाटक के कॉफी बागानों में पर्यटन का नया चलन, अनूठे ठहरने की व्यवस्था

कूर्ग और चिकमगलूर के बागान मालिक अब कॉफी उत्पादन को पर्यटन का आकर्षण बना रहे हैं। स्थानीय इतिहास, जैव विविधता और पीढ़ियों के कृषि ज्ञान से समृद्ध अनुभव प्रदान कर रहे हैं।

LSN India · 24 October 2026

कर्नाटक के कॉफी बागानों में पर्यटन का नया चलन, अनूठे ठहरने की व्यवस्था

कर्नाटक के प्रसिद्ध कॉफी क्षेत्रों में एक नया ट्रेंड उभर रहा है। कूर्ग और चिकमगलूर के कॉफी बागानों पर अवस्थित रिसॉर्ट्स अब सिर्फ आवास नहीं बल्कि संपूर्ण कृषि अनुभव प्रदान कर रहे हैं। ये ठहरने की व्यवस्थाएं पर्यटकों को कॉफी के दाने से लेकर प्याले तक की पूरी यात्रा में शामिल करती हैं।

इन बागानों में ठहरने वाले मेहमानों को कॉफी के खेतों में काम करने, फसल तोड़ने और प्रसंस्करण प्रक्रिया को समझने का मौका मिलता है। स्थानीय किसान और विशेषज्ञ आगंतुकों को पीढ़ियों से चली आ रही कृषि पद्धतियों से परिचित कराते हैं। यह अनुभव पर्यटकों को क्षेत्र की समृद्ध कृषि विरासत के करीब लाता है।

इसके अलावा, ये बागान स्थानीय जैव विविधता को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पश्चिमी घाट के इस क्षेत्र में विभिन्न पक्षी प्रजातियां और पौधों की दुर्लभ किस्में पाई जाती हैं। पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदाय इन पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

इस पहल से न केवल पर्यटन शिल्प को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंच रहा है। किसान परिवार अपने ज्ञान और अनुभव साझा करके आय का अतिरिक्त स्रोत प्राप्त कर रहे हैं। इस मॉडल से भारतीय कृषि पर्यटन को एक नई दिशा मिल रही है।