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कर्नाटक में कॉफी की खेती का रकबा ठहरा हुआ: केपीए अध्यक्ष
कर्नाटक कॉफी उत्पादकों के सामने राज्य सहायता, सिंचाई के लिए सस्ते कर्ज और जलवायु-प्रतिरोधी किस्मों की कमी की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। इससे कॉफी की खेती का विस्तार रुक गया है।
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कर्नाटक कॉफी उत्पादकों के संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि राज्य में कॉफी की खेती का रकबा विगत समय में बढ़ नहीं रहा है। इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं जो उद्योग को गंभीर संकट में डाले हुए हैं।
कॉफी उत्पादकों को सबसे बड़ी समस्या राज्य सहायता की कमी से जूझ रही है। इसके अलावा, ड्रिप सिंचाई प्रणाली के विस्तार के लिए दीर्घकालीन और सस्ते कर्ज की उपलब्धता न के बराबर है। ये कारक किसानों को नई खेती का विस्तार करने में मजबूर कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, बदलती जलवायु के अनुरूप उपयुक्त कॉफी की किस्मों की पर्याप्त उपलब्धता न होना भी एक बड़ा मुद्दा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौजूदा कॉफी की किस्मों की उत्पादकता में गिरावट आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉफी उद्योग को बचाना है तो राज्य को सहायता बढ़ानी होगी और उद्पादकों को आधुनिक सिंचाई तकनीक और जलवायु-सहिष्णु किस्मों तक पहुंच प्रदान करनी होगी। इसके बिना कर्नाटक की कॉफी खेती और सिकुड़ने का खतरा है।