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कर्नाटक में मानसून के 79 दिन लगभग सूखे रहे, फसलों को भारी नुकसान
कर्नाटक में संपन्न हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून में कम बारिश के साथ-साथ वर्षा का असमान वितरण भी रहा। इससे राज्य में कृषि को गंभीर नुकसान का सामना करना पड़ा।
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कर्नाटक में इस बार का दक्षिण-पश्चिम मानसून केवल कम बारिश नहीं रहा, बल्कि वर्षा का असमान वितरण भी एक बड़ी समस्या साबित हुआ। कुल 122 दिनों के मानसून काल में से 79 दिन लगभग पूरी तरह सूखे रहे, जिससे राज्य भर में व्यापक पानी की कमी की स्थिति बनी।
इस असंतुलित वर्षा पैटर्न के कारण कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में फसलें काफी प्रभावित हुई हैं। जहां कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा हुई, वहीं अन्य क्षेत्रों को पर्याप्त पानी नहीं मिला। इस असमानता ने किसानों की समस्याओं को और बढ़ा दिया है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति मिट्टी की नमी को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है और बीज बोने से लेकर फसल पकने तक की प्रक्रिया को बाधित करती है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों जैसे धान, मक्का और दालों में उल्लेखनीय नुकसान की संभावना है।
राज्य सरकार और कृषि विभाग को इस स्थिति के मद्देनजर किसानों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि आने वाले सीजन में वे बेहतर तैयारी कर सकें।