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सूखे से जूझते शिवमोग्गा के गांव ने विवाह पर मांस भोजन पर प्रतिबंध लगाया
शिवमोग्गा जिले के शिकारीपुर से लगभग 30 किमी दूर स्थित हरिगी गांव के निवासियों ने गंभीर सूखे के मद्देनजर विवाह समारोहों में मांसाहारी भोज पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। कृषि प्रधान क्षेत्र में यह कदम जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के प्रति गांववासियों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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शिवमोग्गा जिले के हरिगी गांव के निवासियों ने विवाह अनुष्ठानों के दौरान परंपरागत रूप से आयोजित किए जाने वाले मांसाहारी भोजन को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। यह निर्णय इस क्षेत्र में चल रहे गंभीर सूखे के कारण लिया गया है, जो स्थानीय कृषि समुदाय को भीषण संकट में डाल रहा है।
जल संकट की गंभीरता को देखते हुए गांव की जनता ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया है कि विवाह समारोहों में परंपरागत 'बीगारूता' को सीमित किया जाए। यह मांसाहारी भोज प्रायः बड़ी संख्या में मेहमानों को परोसे जाते हैं और इनमें पर्याप्त पानी और अन्य संसाधनों का उपयोग होता है।
हरिगी गांव की यह पहल सूखे की स्थिति में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत करती है। कृषि प्रधान इस क्षेत्र में पानी की किल्लत से जूझ रहे किसानों के बीच ऐसे कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अनुमान है कि यह प्रतिबंध गांव में विवाह अनुष्ठानों से जुड़े अनावश्यक व्यय को कम करने के साथ-साथ जल संरक्षण में भी मदद देगा। स्थानीय समुदाय ने यह निर्णय सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया है।