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करवा चौथ का चांद दिखा, व्रत खोलने की तैयारी शुरू
करवा चौथ का पवित्र चांद दिख गया है। महिलाएं अब अर्घ्य देने और छलनी से पति का चेहरा देखने की परंपरागत विधि का पालन कर सकती हैं।
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करवा चौथ की परंपरागत रीति-रिवाज को मानते हुए महिलाओं द्वारा व्रत रखे जाने का समय आ गया है। चांद दिखाई देने के साथ ही पूजा की तैयारी शुरू हो गई है। इस दिन विवाहित महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं और चांद देखने के बाद ही व्रत तोड़ती हैं।
व्रत खोलने की प्रक्रिया में अर्घ्य देना प्रमुख है। महिलाएं चांद को जल, दूध और गेहूं से अर्घ्य देती हैं। इसके पश्चात परंपरागत रूप से छलनी के माध्यम से पति का चेहरा देखा जाता है, जिसके बाद पति अपनी पत्नी को कुछ मिठाई खिलाते हैं।
व्रत खोलने से पहले पूजा की संपूर्ण विधि का पालन किया जाता है। गाय के गोबर से बने दीये जलाए जाते हैं और करवा नामक मिट्टी के बर्तन को पूजा जाता है। इस व्रत को लेकर मान्यता है कि इससे पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।
भारत के विभिन्न हिस्सों में करवा चौथ मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तरी और मध्य भारत में व्यापक रूप से मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन अपने परिवार के साथ इस पवित्र दिन को सांस्कृतिक मूल्यों के साथ मनाती हैं।