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करवा चौथ की परंपरा महाभारत काल से, द्रौपदी ने रखा था पहला व्रत
करवा चौथ का त्यौहार केवल आधुनिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें महाभारत काल तक जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं द्रौपदी को इस व्रत के महत्व के बारे में बताया था।
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करवा चौथ व्रत की परंपरा को हिंदू धर्मग्रंथों में महाभारत के समय से संबंधित माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को विवाहित जीवन में सुख और समृद्धि के लिए इस व्रत का विधान सिखाया था।
कहा जाता है कि द्रौपदी ने कृष्ण के निर्देश पर करवा चौथ का व्रत रखना शुरू किया। इस व्रत को रखने के पश्चात उनके दांपत्य जीवन में आ रहे संकटों में कमी आई और उनका वैवाहिक जीवन सुख से भर गया।
इस पौराणिक कथा के आधार पर, करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अपने पति की लंबी उम्र और कल्याण की कामना करने का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
करवा चौथ हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जल व्रत रखती हैं।