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जम्मू-कश्मीर में सामाजिक समूहों पर प्रतिबंध नीति की समीक्षा करें: मिरवाइज
मिरवाइज उमर फारूक ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में एक टिकाऊ राजनीतिक प्रक्रिया तब तक नहीं बनाई जा सकती जब तक वास्तविक आवाजों को बाहर रखा जाता रहे या उनकी जगह सुविधाजनक विकल्प ले लिए जाएं।
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जम्मू-कश्मीर के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मिरवाइज उमर फारूक ने क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंधों की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में दीर्घकालीन राजनीतिक स्थिरता के लिए सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है।
मिरवाइज के अनुसार, संवैधानिक ढांचे के भीतर सभी प्रकार की राय और आवाजों को स्वीकार करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मौलिक आधार है। उन्होंने जोर दिया कि प्रभावी राजनीतिक समाधान तभी संभव है जब विविध दृष्टिकोणों को समाहित किया जाए और समावेशी संवाद की परिपाटी अपनाई जाए।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि किसी विशेष दृष्टिकोण को थोपना या वैकल्पिक आवाजों को दबाना लंबे समय में विभाजन और अस्थिरता का कारण बन सकता है। उन्होंने क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियों के समाधान के लिए एक समावेशी और संवादमूलक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
मिरवाइज की टिप्पणी कश्मीर घाटी में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों के साथ जुड़ाव की गतिविधियों के बीच आई है। उन्होंने कहा कि केवल व्यापक भागीदारी और सर्वसम्मति के आधार पर ही क्षेत्र को आगे बढ़ाया जा सकता है।