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कश्मीरी भाषा बचाने के लिए धार्मिक नेताओं का अभूतपूर्व कदम
कश्मीर में धार्मिक नेताओं ने स्थानीय भाषा को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। 16 अक्टूबर को मस्जिदों में कश्मीरी भाषा में उपदेश दिए जाएंगे।
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कश्मीर के धार्मिक नेताओं ने विलुप्त हो रही कश्मीरी भाषा को बचाने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। इस पहल के तहत 16 अक्टूबर को सभी मस्जिदों में धार्मिक उपदेश स्थानीय भाषा में दिए जाएंगे।
यह घोषणा मिरवाइज द्वारा बुडगाम के प्रसिद्ध संत हजरत शेख नूर-उद-दीन नूरानी की उर्स (पुण्य स्मरण) के अवसर पर की गई। संत का यह वार्षिक आयोजन कश्मीरी मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है।
कश्मीरी भाषा के संरक्षण को लेकर यह पहल धार्मिक समुदाय द्वारा सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने की गंभीर चिंता को दर्शाता है। भाषा के प्रति यह प्रतिबद्धता क्षेत्र में सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का अभिन्न अंग है।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब कश्मीरी भाषा युवा पीढ़ी में तेजी से लुप्त हो रही है। धार्मिक प्रतिष्ठानों द्वारा स्थानीय भाषा का उपयोग इसे जीवंत रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।