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कश्मीरी पंडितों ने बलिदान दिवस मनाया, नरसंहार मान्यता की मांग दोहराई
जम्मू में कश्मीरी पंडित समुदाय ने बलिदान दिवस मनाते हुए हिंसा और विस्थापन को 'नरसंहार' के रूप में कानूनी मान्यता देने की मांग दोहराई है। समुदाय ने घाटी में केंद्रीय सुरक्षा के तहत अलग मातृभूमि की स्थापना के लिए भी आह्वान किया है।
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जम्मू में शुक्रवार को कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रतिनिधियों ने बलिदान दिवस पर एकत्र होकर अपनी ऐतिहासिक मांगों को दोबारा जोर देते हुए कहा कि उनके साथ हुई हिंसा और जबरन विस्थापन को औपचारिक रूप से नरसंहार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
समुदाय के नेताओं ने कश्मीर घाटी में एक अलग मातृभूमि की स्थापना की लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराते हुए कहा कि यह क्षेत्र भारतीय संघ के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की व्यवस्था से ही समुदाय की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित हो सकता है।
बलिदान दिवस समारोह में कश्मीरी पंडितों के दर्दनाक अतीत को याद करते हुए कई प्रतिभाशाली वक्ताओं ने अपने समुदाय की पीड़ा और संघर्ष के बारे में बात की। समुदाय के पदाधिकारियों ने जोर दिया कि केवल औपचारिक कानूनी मान्यता ही उनके ऐतिहासिक अन्याय के लिए सच्ची न्याय व्यवस्था प्रदान कर सकती है।
कश्मीरी पंडितों का विस्थापन 1990 के दशक की शुरुआत में हुआ था। पिछले तीन दशकों में समुदाय विभिन्न राज्यों में बिखरा हुआ रहा है, और उनकी मातृभूमि में वापसी का सवाल भारतीय राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।