World · India Bureau
विवाहित कथावाचक चित्रलेखा ने प्रेम और मोह पर दिया विचारशील जवाब
प्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्रलेखा ने एक पॉडकास्ट में विवाहित जीवन में प्रेम और मोह के बीच अंतर को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि शुद्ध निष्काम प्रेम दुनिया में किसी से नहीं होता।
LSN India ·

कथावाचक देवी चित्रलेखा ने विवाहित जीवन में प्रेम के स्वरूप पर विस्तार से विचार व्यक्त किए हैं। एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपने पति से मोह या प्रेम करती हैं, तो उन्होंने इसे लेकर एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
चित्रलेखा ने कहा कि मोह और प्रेम के बीच की सीमा रेखा अक्सर धुंधली होती है। उनके अनुसार, दुनिया में किसी के साथ पूर्णतः शुद्ध या निष्काम प्रेम संभव नहीं होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी रिश्ते में स्वार्थ और भावनाएं दोनों ही मिश्रित होती हैं।
अपने विचार को और स्पष्ट करते हुए, चित्रलेखा ने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति सिर्फ दो दिन के लिए किसी की बात मानना बंद कर दे तो सभी रिश्ते टूट जाते हैं। इससे वह दिखाना चाहती हैं कि हर रिश्ता कुछ न कुछ आपसी समझ, देखभाल और निरंतर प्रयास पर निर्भर करता है।
विवाहित जीवन के बारे में चित्रलेखा के यह विचार आधुनिक समय में रिश्तों की वास्तविकता पर एक ईमानदार दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। वह परंपरागत और समकालीन जीवन दर्शन को जोड़कर एक संतुलित विचार साझा करती हैं।