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मैं बहुजनों का तीर हूँ, न कि बीआरएस या भाजपा का: कविता
तेलंगाना की राजनेता कविता कुमारी ने अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि वह किसी विशेष पार्टी की नहीं, बल्कि बहुजन समाज की प्रतिनिधि हैं।
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तेलंगाना की प्रभावशाली राजनेता कविता कुमारी ने अपनी राजनीतिक पहचान स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह न तो बीआरएस (भारतीय राष्ट्रीय समाज पार्टी) की हैं और न ही भाजपा की। उन्होंने जोरदार शब्दों में अपने को बहुजन समाज का प्रतिनिधि बताया है।
कविता ने बताया कि उनके राजनीतिक निर्णय और दृष्टिकोण बहुजन समाज के हित और आकांक्षाओं द्वारा संचालित होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी वफादारी किसी पार्टी के प्रति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के प्रति है।
यह बयान तेलंगाना की जटिल राजनीति में कविता की स्वतंत्र स्थिति को रेखांकित करता है। राज्य में विभिन्न पार्टियों के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच, कविता ने अपनी राजनीतिक स्वायत्तता पर बल दिया है।
कविता के इस बयान से स्पष्ट है कि वह तेलंगाना की राजनीति में एक स्वतंत्र और प्रभावशाली खिलाड़ी के रूप में काम करना चाहती हैं। उनके अनुसार, उनके कार्य और नीतियां बहुजन समाज के कल्याण और सशक्तिकरण को ही प्राथमिकता देते हैं।