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केरल में PSC रैंक सूची की वैधता बढ़ाने के फैसले पर मतभेद
केरल कैबिनेट के PSC रैंक लिस्ट की वैधता विस्तारित करने के निर्णय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। रैंक धारकों और यूडीएफ से संबद्ध शिक्षकों के संगठन इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, जबकि वामपंथी संगठन सरकार पर 'उम्मीदवारों को धोखा देने' का आरोप लगा रहे हैं।
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केरल सरकार के लोक सेवा आयोग (PSC) रैंक सूची की वैधता बढ़ाने के कैबिनेट फैसले को लेकर राज्य में विरोधाभासी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस निर्णय के संबंध में रैंक सूची में शामिल उम्मीदवारों और यूडीएफ-संबद्ध शिक्षकों के संगठनों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन वामपंथी दलों से जुड़े शिक्षकों के संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।
रैंक धारकों का मानना है कि इस कदम से उन्हें नियुक्ति के अवसर में वृद्धि होगी। यूडीएफ से संबद्ध शिक्षकों के मंच भी इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। उनके अनुसार, रैंक सूची की वैधता बढ़ाने से शिक्षा क्षेत्र में खाली पदों को भरने में तेजी आएगी और नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार होगा।
दूसरी ओर, वामपंथी विचारधारा से जुड़े शिक्षकों के संगठनों का आरोप है कि यह निर्णय उम्मीदवारों को भ्रामक संदेश दे रहा है। उनका तर्क है कि यह कदम नई भर्ती प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है और पुरानी रैंक सूची को अनावश्यक रूप से लंबा खींचता है। इन संगठनों की मांग है कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे।
केरल में PSC परीक्षाओं के माध्यम से शिक्षकों सहित विभिन्न पदों पर नियुक्ति की जाती है। राज्य सरकार ने रैंक सूची के विस्तार को लेकर जो निर्णय लिया है, वह आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बने रहने की संभावना है।