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केरल में इलायची की खेती पर कीटनाशकों का दबाव बढ़ रहा है
तापमान में वृद्धि से साल भर की कटाई के चक्र में किसान एक ही टैंक में पांच-छह तरह के रसायनों का मिश्रण तैयार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के 'रासायनिक कॉकटेल' से पौधों में रोग और कमजोरी आती है।
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केरल में इलायची की खेती एक गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान ने किसानों को साल भर की कटाई का चक्र अपनाने के लिए मजबूर किया है। इस दौरान उत्पादकता बनाए रखने के लिए वे कीटनाशकों, कवकनाशकों, पोषक तत्वों और वृद्धि प्रवर्धकों सहित पांच से छह विभिन्न रासायनिक उत्पादों को एक ही टैंक में मिलाकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञ इस प्रथा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस तरह के 'रासायनिक कॉकटेल' का इलायची के पौधों पर उल्टा असर पड़ता है। ये विविध रसायन एक साथ मिलकर पौधों को कमजोर करते हैं और उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं।
इस अनियंत्रित रासायनिक उपयोग का सबसे बड़ा नुकसान पराग कणों को स्थानांतरित करने वाले जीवों को हो रहा है। कीटनाशकों का यह अधिक उपयोग परागणकारी कीटों और अन्य आवश्यक जीवों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है, जो पौधों के प्राकृतिक प्रजनन चक्र को बाधित कर रहा है।
केरल की इलायची खेती की स्थिति सुधारने के लिए विशेषज्ञ किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक कृषि पद्धति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से बचते हुए जैविक और समन्वित कीट प्रबंधन के विकल्पों की ओर ध्यान देने की जरूरत है ताकि इलायची की पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखा जा सके।