Politics · India Bureau
केरल में उपभोक्ता मामलों का बैकलॉग 26,668 तक पहुंचा, जिलीय आयोगों में तेजी से वृद्धि
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केरल के जिलीय आयोगों में लंबित मामलों की संख्या दिसंबर 2023 के बाद से लगभग 76 प्रतिशत बढ़ गई है। यह आंकड़ा कर्नाटक से दोगुना और तमिलनाडु से छह गुना अधिक है।
LSN India ·

केरल के जिलीय उपभोक्ता न्यायालयों में लंबित मामलों का संकट गहराता जा रहा है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक द्वारा प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, केरल में जिलीय आयोगों के समक्ष 26,668 मामले लंबित हैं।
यह आंकड़ा पिछले आठ महीनों में बेहद चिंताजनक दर से बढ़ा है। दिसंबर 2023 की तुलना में वर्तमान में बैकलॉग में लगभग 76 प्रतिशत की बृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि के कारण केरल की स्थिति अन्य महत्वपूर्ण राज्यों की तुलना में काफी खराब हो गई है।
तुलनात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि केरल में लंबित मामलों की संख्या कर्नाटक की तुलना में दोगुनी है। तमिलनाडु के जिलीय आयोगों की तुलना में यह आंकड़ा छह गुना अधिक है। यह असमानता उपभोक्ता विवादों के निपटारे में एक गंभीर चुनौती को दर्शाती है।
इस बढ़ते बैकलॉग से उपभोक्ताओं को न्याय पाने में व्यापक विलंब हो रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति जिलीय आयोगों में अतिरिक्त संसाधनों और कर्मचारियों की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है। राज्य सरकार को इस संकट से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।