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केरल के मलप्पुरम में परंपरागत लकड़ी की आरी बनाने के कारीगरों को सम्मानित किया गया
केरल के मलप्पुरम जिले में मोइदीनकुट्टी और मोहम्मदकुट्टी को लकड़ी की आरी से संबंधित परंपरागत शिल्प को जीवंत रखने के लिए सम्मानित किया गया है। इस लुप्तप्राय कला को संरक्षित करने के प्रयासों के लिए पुचंगल अबुबक्कर को भी पुरस्कृत किया गया।
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केरल के मलप्पुरम जिले में दो अनुभवी कारीगरों को उनके परंपरागत शिल्प के प्रति योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। मोइदीनकुट्टी और मोहम्मदकुट्टी लंबे समय से लकड़ी की आरी से संबंधित परंपरागत तरीकों का पालन कर रहे हैं, यह एक ऐसी कला है जो धीरे-धीरे लोगों की स्मृति से विलुप्त हो रही है।
लकड़ी की आरी चलाने का यह पारंपरिक व्यवसाय भारतीय संस्कृति और कारीगरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आधुनिक यंत्रों के आने और बाजार में बदलाव के कारण यह कौशल धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है। ऐसे में इन दोनों कारीगरों का यह पारंपरिक ज्ञान और कौशल संरक्षित रहना महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर पुचंगल अबुबक्कर को भी पुरस्कृत किया गया, जिन्होंने परंपरागत लंबी आरी को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण काम किया है। उनके प्रयासों से इस विलुप्त हो रहे शिल्प को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।
इस तरह के सम्मान न केवल इन कारीगरों के अथक परिश्रम को मान्यता देते हैं, बल्कि भारत की समृद्ध कारीगरी परंपरा को संरक्षित रखने का संदेश भी देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहल से परंपरागत शिल्पों को बचाए रखने में मदद मिल सकती है।